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24 Oct 2021 5:44 PM
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राहुल गांधी ने मिशन-2018 के लिए बनाया ब्लू प्रिंट, इन 8 बाधाओं को करना है पार

नई दिल्ली.

कांग्रेस के लिए अपने अस्तित्व को बचाए रखने की एक बड़ी चुनौती 2018 में आ खड़ी हुई है.

कांग्रेस की राजनीति के लिहाज से साल 2018 काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. इस साल में राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं.

कांग्रेस ने जहां हिमाचल में भी अपनी सरकार को खो दिया वहीं गुजरात में पहले से बेहतर प्रदर्शन किया.

कांग्रेस 8 राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी के अस्तित्व के साथ अपने ऊपर लगे दागों को भी धोना होगा.

अगर ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा अपने कांग्रेस मुक्त भारत के मिशन को पाने में कामयाब हो जाएगी. देश की सबसे पुरानी राजनीति पार्टी अर्श से फर्श का सफर पूरा कर लेगी. इस सब के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन 8 राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर एक ब्लू प्रिंट तैयार करना शुरू कर दिया है. लेकिन पार्टी के सामने कई चुनौतियां भी हैं.

कांग्रेस पार्टी उत्साहित है

हाल में हुए हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा, वहीं गुजरात में कांग्रेस को पिछली बार के चुनावों की तुलना में इस बार मिली ज्यादा सीटों से पार्टी उत्साहित है. इसका उदाहरण गुजरात चुनावों में देखने को मिल गया. कांग्रेस मानती है कि उन्होंने गुजरात के लिए रणनीति बनाने में देरी की, अगर कुछ माह पहले से तैयारी करते तो शायद आज सूबे की सत्ता में हम होते.

कांग्रेस ने अब तय किया

मिशन-2018 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अब तय किया है कि वह भाजपा को उसकी की रणनीति से मात देगी. इसके चलते पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले मंदिर-मंदिर दर्शन करते नजर आए. अब साफ हो गया है, कांग्रेस भी सॉफ्ट हिन्दुत्व की राह पर चल पड़ी है.

कांग्रेस के लिए ये हैं चुनौतियां…

2018 साल जिन 8 राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें चार उत्तर पूर्व राज्य हैं. मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड की विधानसभा का कार्यकाल मार्च में खत्म हो रहा है. ऐसे में इससे पहले इन राज्यों में चुनाव हो सकते हैं. इसी क्रम में मई के अंत तक कर्नाटक विधानसभा का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा, ऐसे में कर्नाटक में अप्रैल-मई में चुनाव होंगे. अगर बात मिजोरम, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की करें तो इन राज्यों में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होंगे.




त्रिपुरा

1- बता दें कि कि त्रिपुरा में मुख्यमंत्री माणिक सरकार के नेतृत्व में सीपीएम यहां पिछले 25 सालों से सत्ता में है.

2- BJP वामपंथ के गढ़ में तख्तापटल की कोशिश कर रही है.

3- असम सरकार में भाजपा के ताकतवर मंत्री हेमंत बिस्वसरमा को त्रिपुरा चुनावों की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है.

4- विस्वसरमा नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस यानी नेडा के माध्यम से भाजपा पूरे नार्थ ईस्ट में भगवा फहराने की तैयारी कर रही है.

मेघालय

2- भाजपा यहां कांग्रेस को पटखनी देने की तैयारी कर रही है.

3- कांग्रेस को यहां बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस के पांच विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया.

4- इनके साथ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के एक विधायक और दो निर्दलीय विधायकों ने भी सदन से इस्तीफा दे दिया.

5- कांग्रेस के भीतर मचे कोहराम में भाजपा अपने लिए जगह तलाशने की तैयारी में है.

नागालैंड

1- नागाल पीपुल्स फ्रंट की सरकार है, जिसे भाजपा का भी समर्थन है. यानी नागालैंड में एनडीए का ही मुख्यमंत्री है.

2- 2013 में एनसीपी के तीन विधायकों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया था और एनडीए सरकार को समर्थन दिया.

3- बीजेपी की कोशिश है कि नॉर्थ-ईस्ट के इस राज्य में भगवा परचम लहराया जाए. वैसे भी भाजपा के एजेंडे में नॉर्थ ईस्ट काफी उपर है.

कर्नाटक

1- सिद्धरमैया के नेतृत्व में 5 साल तक चलने वाली कांग्रेस की सरकार से सत्ता छीनने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति बना ली है.

2- राज्य में अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं.

3- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तो कर्नाटक में 75 दिनों तक चलने वाली ‘नव कर्नाटक निर्माण परिवर्तन रैली’ की शुरुआत कर दी है.




मिजोरम

1- मौजूदा समय में मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है, जिसे बदलने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

2- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम में भी अपनी पिछली यात्रा के दौरान तुईरिल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था।

3- उस दौरान भाजपा ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए ग्रेस को विकास कार्य में रोड़ा अटकाने को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

मध्यप्रदेश

1- शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में यहां 2003 से लगातार भाजपा की सरकार है. कांग्रेस के लिए यहां सत्ता परिवर्तन करना एक चुनौती होगा.

2- मामा के नाम से मशहूर शिवराज सिंह चौहान की लो प्रोफाइल छवि और उनके कामों को लेकर पार्टी से लेकर जनता के बीच उनकी पैठ बरकरार है.

3- कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बनाई है. पार्टी राज्य के बहुचर्चित व्यापमं समेत अन्य घोटालों को अपना चुनावी मुद्दा बनाएगी.

4- कांग्रेस के लिए यहां अपने भीतर की गुटबाजी को खत्म करना भी एक चुनौती ही होगी.

5- राज्य में ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच की गुटबाजी के चलते पार्टी को पिछले कुछ सालों में खासा नुकसान भी हुआ है.

छत्तीसगढ़

1- लगातार तीन बार से यहां BJP सरकार की कमान मुख्यमंत्री रमन सिंह के हाथों में ही है.

2- आदिवासी बहुल इस राज्य में भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बन सकती है.

3- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए यहां अपने एक कद्दावर प्रतिनिधि तैनात करना जरूरी होगा.

4- नवंबर-दिसंबर में राज्य में चुनाव होना है.

5. कांग्रेसी नेता तो दूर-दूर तक कोई ऐसा नेता नजर नहीं आता. ऐसे में यहां कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौतियां हैं.

राजस्थान

1- साल के अंत में जिन राज्यों में विधानसभा चुनावों होने हैं उनमें से राजस्थान भी एक है.

2- राजस्थान में कांग्रेस की तरफ से इस बार भाजपा को तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

3- भाजपा के लिए इस बार काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

4. वसुंधरा राजे के नेतृत्व में 200 में से 163 सीटों पर जीत हासिल की थी.

5. कांग्रेस के लिए इस बार भाजपा के पिछले प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनानी होगी.

मनोंरजन / फ़ैशन

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