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16 Oct 2021 5:44 PM
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जापान की ट्रैफिक लाइट में होता है नीली बत्ती का प्रयोग, जानें दिलचस्प वजह

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नई दिल्ली. आमतौर पर ट्रैफिक लाइट में लाल, पीला और हरा रंग ही देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है कि इन लाइट्स के अलावा ट्रैफिक लाइट्स में नीली बत्ती का भी उपयोग किया जाता है. हां, जापान में पीली या यलो लाइट्स के बदले नीली लाइट का प्रयोग किया जाता है. जापान में नीली बत्ती को ‘एओ’ ऐसा कहा जाता है कि जापान में बहुत पहले सिर्फ सफेद, काला, नीला और लाल हरा रंग ही हुआ करता था ऐसे में इस कलर का इस्तेमाल वहां लोग चलने के लिए करते हैं.

जापान में हरे रंग के लिए




जापान में नीले और हरे दोनों ही रंगों के लिए एओ का ही उपयोग किया जाता था लेकिन कुछ सालों बाद हरे रंग के लिए नया शब्द ‘मिडोरी’ विकसित किया गया. दोनों रंगों के लिए अलग-अलग नाम होने के बावजूद आज भी जापान में हरे रंग की चीजों के लिए ‘एओ’ शब्द का ही प्रयोग होता है, जबकि दिखने में ये चीजें ‘मिडोरी’ यानी कि हरी होती हैं. जापान में ट्रैफिक लाइट के रंग इन्हीं नीले और हरे के भाषाई मिश्रण है.

आधिकारिक दस्तावेज या लिखित रूप में

जापान में ट्रैफिक लाइट्स का प्रयोग साल 1930 में शुरू हुआ और उस समय गो यानी कि जाने के लिए हरी लाइट का ही उपयोग किया जाता था लेकिन आधिकारिक दस्तावेज या लिखित रूप में ट्रैफिक लाइट के हरे रंग को ‘मिडोरी’ न लिखकर ‘एओ’ लिखा गया, जिसका अर्थ होता है नीला. शायद यही वजह थी कि जापान ने वर्ष 1968 में वियना कन्वेन्शन ऑन रोड साइन एंड सिग्नल की संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जबकि भारत सहित लगभग 69 देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. वियना अंतरराष्ट्रीय संधि का उद्देश्य ट्रैफिक सिग्नल को मानकीकृत करना है.

दस्तावेजों में कोई बदलाव नहीं

जापान सरकार ने साल 1973 में कहा कि वह अपने दस्तावेजों में कोई बदलाव नहीं करेगी वह ट्रैफिक लाइट्स के रंगों में बदलाव करेगी और इसीलिए सरकार ने हरे रंग का ही नीला शेड (ब्लुइश ग्रीन) ट्रैफिक लाइट में प्रयोग करने का फैसला लिया. यानी कानूनी रूप से जापान में भी ‘गो’ के लिए ग्रीन लाइट ही है, लेकिन दिखने में यह नीली है.

मनोंरजन / फ़ैशन

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