संदेश ! हमारी सोच, आपकी पहचान !
संदेश ! हमारी सोच, आपकी पहचान !
19 Sep 2019 5:44 PM
BREAKING NEWS
ticket title
Coal India 9,000 बहाली करेगी, एग्जिक्युटिव लेवल 4,000 नियुक्तियां होगी
डिफेंस मिनिस्टर ने तेजस से उड़ान भरी, कहा- अद्भुत और शानदार अनुभव
‘कहो ना प्यार है’ को पिछले 20 सालों की बेस्ट फ़िल्म का अवॉर्ड
बिहार: हिंसक हिसक झड़प मामले में पटना यूनिवर्सिटी के 28 स्टूडेंट जेल भेजे गये, 15 आरोपितों की तलाश
डीसी लाइन पर जल्द चलेगी धनबाद-चंद्रपुरा पैसेंजर
ममता बनर्जी ने अमित शाह से की मुलाकात, कहा-NRC सूची से बाहर लोगों को एक मौका और मिले
यूपी में नाबालिग मुस्लिम लड़की की शादी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज,राज्य के गृह सचिव को तलब किया
बालाकोट सेक्टर में मिले 9 जिंदा मोर्टार, भारतीय सेना ने किया निष्क्रिय
सुरक्षाबलों ने घाटी में 273 आतंकियों पर साधा निशाना, दहशतगर्दों की सूची आई सामने
तिहाड़ जेल भेजा में चिदंबरम के बाद कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार

जापान के रोबोटिक HTV-7 कार्गो स्पेसक्राफ्ट की मदद से आसमान में लग रही है सीढ़ी

Post by relatedRelated post

टोक्यो : पहली बार शनिवार को अंतरिक्ष में सीढ़ी का इस्तेमाल होने वाला है. जापानी STARS-Me (स्पेस टीथर्ड ऑटोनोमस रोबोटिक सेटेलाइट-मिनी एलीवेटर) की किसी भी समय टेस्टिंग हो सकती है. जापान के रोबोटिक HTV-7 कार्गो स्पेसक्राफ्ट की मदद से STARS-Me पेलोड 27 सितंबर, 2018 को ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंच चुका है. इसका निर्माण जापान के शिजुओका यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने जापानी कंस्ट्रक्शन फर्म ओबायाशी की मदद से किया है.

जापान के अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े अधिकारियों ने space.com को बताया कि टेस्ट में एक छोटे से बक्से और करीब 30 फुट (9 मीटर) लंबे तार का इस्तेमाल किया जायेगा. तार को दोनों सिरे से दो क्यूबसैट्स से खींचकर बांधा जायेगा. मोटर से चलने वाले बॉक्स की मॉनिटरिंग के लिए मिनी सेटेलाइट्स पर कैमरे लगाये गये हैं.

स्वॉन कहते हैं कि STARS-Me एक महत्वपूर्ण प्रयोग है, लेकिन धरती से अंतरिक्ष तक सीढ़ी लगाना अपनी दूर की कौड़ी है. स्पेस-एलीवेटर कम्युनिटी यह महसूस करता है कि उन्होंने ‘तकनीक ईजाद’ कर ली है. वे उस प्रौद्योगिकी से आगे निकल चुके हैं, जिसकी अब तक मदद ली जाती रही. हाल ही में ISEC ने कहा कि स्पेस-एलीवेटर प्रोजेक्ट पर बृहद परिप्रेक्ष्य में चर्चा होनी चाहिए. स्पेस एलीवेटर्स सेंटर्स का मानना है कि आधारभूत संरचना के विकास की शुरुआत चर्चा से ही हो सकती है, लेकिन उन्हें स्थापित करना बहुत बड़ी बात होती है.
स्पेस एलीवेटर की राह में दो रोड़े

पीयर्सन कहते हैं कि पहली समस्या है कि इतनी मजबूत सामग्री तैयार की जाये, जो अंतरिक्ष में अपने भार को सहन कर सके. दशकों की कोशिशों के बाद इस दिशा में नतीजे आने लगे हैं. इसे मजबूती देने के लिए 62,000 मील (एक लाख किलोमीटर) लंबे सिंगल क्रिस्टल में यह संभावना दिख रही है. श्रेष्ठ सामग्री कार्बन स्ट्रक्चर पर आधारित हैं. चाहे ये नैनोट्यूब्स हों या ग्रेफीन शीट्स.

पियर्सन कहते हैं कि धरती पर लोगों को हाइ-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी देने के लिए चल रही गतिविधियां इस समस्या को और जटिल बना रही हैं. दुनिया भर में लगातार हजारों सेटेलाइट्स धरती की निचली कक्षा में भेजे जा रहे हैं. स्पेस एलीवेटर को इन सबसे बचाकर रखने की जरूरत होगी. इतना ही नहीं, धरती की कक्षा में विचरण कर रहे सेटेलाइट्स की भी यह जिम्मेदारी होगी कि वे एलीवेटर से दूर रहें. ये दोनों ही स्थितयां बेहद कठिन हैं.

मनोंरजन / फ़ैशन

‘कहो ना प्यार है’ को पिछले 20 सालों की बेस्ट फ़िल्म का अवॉर्ड
‘कहो ना प्यार है’ को पिछले 20 सालों की बेस्ट फ़िल्म का अवॉर्ड

मुंबई: बॉलीवुड के सबसे बड़े अवॉर्ड्स में से एक इंटरनेशनल इंडियन फिल्म अकेडमी अवॉर्ड्स (IIFA अवॉर्ड्स) की बुधवार 18 सितंबर की रात मुंबई में हुए रंगारंग समारोह में घोषण की गयी. 'कहो ना प्यार है' को पिछले 20 सालों की बेस्ट फ़िल्म का अवॉर्ड दिया गया. ईफा ने 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया.…

Read more

अन्य ख़बरे

Loading…

sandeshnow Video


Contact US @

Email: [email protected]

Phone: +9431124138

Address: Dhanbad, Jharkhand

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com