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19 Sep 2019 5:44 PM
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IIT खड़गपुर ने सिक्के के आकार की डिवाइस बनायी, मस्तिष्क और नर्व के गंभीर रोगों का इलाज होगा, सर्जरी नहीं करानी होगी

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नई दिल्ली: आईआईटी खड़गपुर ने सिक्के के आकार वाली एक खास डिवाइस को तैयार की है. बायोइलेक्ट्रानिक्स इनोवेशन लेबोरेट्री में तैयार यह डिवाइस वायरलेस एनर्जी के कॉन्सेप्ट पर काम करती है. इससे ब्रेन, नर्व, मसल्स और स्पाइनल कॉर्ड से जुड़े ऐसे डिसऑर्डर का ट्रीटमेंट किया जा सकेगा.यह डिवाइस बार-बार होने वाली सर्जरी से भी राहत दिलायेगी.

डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट हेड सुदीप नाग के मुताबिक एक छोटे से सिक्के के आकार की इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाई गयी है. इस चिप का इस्तेमाल कृत्रिम अंगों को लगातार ऊर्जा देने में किया जायेगा. इसकी मदद से बॉडी में न्यूरल कनेक्टिविटी की समस्या का समाधान किया जा सकेगा जिसे अब तक मेडिकल साइंस भी नहीं दूर कर पायी है.

डिवाइस ऐसे काम करेगी डिवाइस

प्रोजेक्ट हेड सुदीप नाग के अनुसार वर्तमान में इम्प्लांट्स स्टेंडर्ड पेसमेकर की बैटरी लाइफ लिमिटेड होने के कारण हर 5 से 10 साल में सर्जरी की जरूरत होती है. इस वायरलेस चिप की मदद से लगातार एनर्जी की सप्लाई जारी की जा सकेगी. इसकी मदद से इम्प्लांट्स का जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है और बार-बार सर्जरी की आशंका को कम किया जा सकता है. खास प्रोग्राम की मदद से तैयार की गई यह चिप्स मरीज को शारीरिक बदलाव के अनुसार खुद को ढालने में मदद करेगी. वर्तमान में इसका उददेश्य अंधापन, लकवा, सेंसरी मोटर डिसफंक्शन, याद्दाश्त कम होना, पार्किंसन ट्यूमर, मिर्गी के दौरे से निपटने में मदद करना है. यह खास डिवाइस बायो सिग्नल्स को समझने में समर्थ है और इलेक्ट्रिकल मेथड से बीमार अंग को कंट्रोल करने में भी मदद करती है.

दावा है कि यह चिप काफी विश्वसनीय साबित होगी. इसकी कीमत कितनी होगी यह साफ नहीं किया गया है लेकिन प्रोफेसर के अनुसार हर वर्ग के लोग इसका खर्चा वहन कर पायेंगे.

स्टूडेंट को मिलेगी नई फील्ड

आईआईटी खड़गपुर की बायोइलेक्ट्रानिक्स इनोवेशन लेबोरेट्री फिलहाल ऐसे ही कई एनर्जी सप्लाई करने वाले इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम्स पर काम कर रही है. इसके अलावा एनिमल टेस्टिंग रूम भी बनाए गये हैं. इसके लिए इंस्टीट्यूट को ग्रांट मिल चुकी है. चिप से इलाज के लिए जल्द ही भारत के बड़े हॉस्पिटल्स और इंस्टीट्यूट से करार कर किया जायेगा. ऐसी ही नई मेडिकल डिवाइस को तैयार करने के साथ जल्द ही छात्रों के लिए यहां बायोइलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई शुरू की जायेगी जो एक नई तरह की फील्ड है.

क्या है बायोइलेक्ट्रॉनिक्स

बायोइलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रॉनिक्स और बायोलॉजी का कॉम्बिनेशन है. इंडिया में इस फील्ड की शुरुआत हुई है. इस क्षेत्र में फिलहाल अभी बायोइलेक्ट्रिक डिवाइस तैयार की जा रही हैं, जो एनर्जी का इस्तेमाल न्यूरल फंक्शन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है.

आईआईटी खड़गपुर हायर एजुकेशन गोल्डन एज युनिवर्सिटी रैंकिंग में

हाल ही इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) खड़गपुर को टाइम्स की 100 शीर्ष उच्च शिक्षा स्वर्णयुग विश्वविद्यालयों की सूची (हायर एजुकेशन गोल्डन एज युनिवर्सिटी रैंकिंग) में जगह मिली है. इसके साथ ही आईआईटी-खड़गपुर को उभरते हुए 50 विश्वविद्यालयों (Emerging University) की सूची में भी शामिल किया गया है. गोल्डन एज रैंकिंग केटेगरी में विश्व के 50 साल से अधिक और 80 साल से कम समय की अवधि के दौरान स्थापित सबसे उत्कृष्ट यूनिवर्सिटी की रैंकिंग की जाती है. टाइम्स की हायर एजुकेशन गोल्डन एज युनिवर्सिटी रैंकिंग में साल 1945-1967 के दौरान स्थापित विश्वविद्यालयों को उन्नत शैक्षणिक मापदंडों के अनुसार शामिल किया जाता है.

मनोंरजन / फ़ैशन

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