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23 Oct 2021 5:44 PM
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डाॅक्टर हरगोविंद खुराना को गूगल ने दी श्रद्धांजलि, जाने क्या है इस भारतीये का योगदान

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नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल खास लोगों को याद करते हुए डूडल बनाकर उन्हें याद करता है. आज गूगल ने नोबेल पुरस्कार विजेता डाॅक्टर हरगोविंद खुराना के जन्मदिन पर याद करते हुए डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्का जन्म अविभाजित भारतवर्ष के रायपुर (जिला मुल्तान, पंजाब) नामक कस्बे में हुआ था. प्रतिभावान् विद्यार्थी होने के कारण विद्यालय तथा कालेज में इन्हें छात्रवृत्तियाँ मिलीं. पंजाब विश्वविद्यालय से सन् १९४३ में बी. एस-सी. (आनर्स) तथा सन् १९४५ में एम. एस-सी. (ऑनर्स) परीक्षाओं में ये उत्तीर्ण हुए तथा भारत सरकार से छात्रवृत्ति पाकर इंग्लैंड गए. बता दें कि हरगोविंद खुराना ने जीन इंजीनियरिंग की व्यवस्था में खासा योगदान किया था. साल 1952 में उन्होंने स्विट्जरलैंड की एक युवती से शादी कर ली थी. उनकी पत्नी भी एक वैज्ञानिक थी.

अमेरिका में सबसे बड़ा सम्मान मिला

बता दें कि डाॅक्टर हरगोविंद खुराना को अमेरिका में सबसे बड़ा सम्मान मिला. 1960 में डॉ. हरगोविंद ने संयुक्त राज्य अमेरिका के विस्कान्सिन विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट ऑव एन्जाइम रिसर्च में प्रोफेसर का पद पर कार्य और इसी संस्था के निदेशक रहे और यहां उन्होंने अमेरिकी नागरिकता स्वीकार कर ली. डाॅक्टर हरगोविंद खुराना को कई सम्मान भी मिले.

नोबेल पुरस्कार

बता दें कि डॉ हरगोविंद ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर डी.एन.ए. अणु की संरचना को स्पष्ट किया था और यह भी बताया था कि डी.एन.ए. प्रोटीन्स का संश्लेषण किस प्रकार करता है. उन्होंने यह भी बताया कि जीन्स का निर्माण कितनी तरह से होता है. डाॅक्टर खुराना ने यह भी बताया कि जीन्स को जीवन की मूल इकाई माना जाता है. उन्होंने ही यह बताया कि जीन्स इस बात को निश्चित करता है कि इंसान का स्वभाव और रंग-रूप कैसा होगा. किसी भी माता-पिता को संतान की प्राप्ति भी दोनों के जीन्स के संयोग से ही होती है। मानव जीवन में जीन्स की महत्ता समझाने के लिए डॉ हरगोविंद को और उनके दोनों अमेरिकी साथियों को डॉ. राबर्ट होले और डॉ. मार्शल निरेनबर्ग को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 09 नवम्बर 2011 को डाॅक्टर हरगोविंद खुराना ने अमेरिका में इस दुनिया को अलविदा कह दिया.




डॉ हरगोविंद खुराना की उपलब्धियां

– 1968 में चिकित्सा विज्ञानं का नोबेल पुरस्कार मिला.

– 1958 में उन्हें कनाडा का मर्क मैडल प्रदान किया गया.

– 1960 में कैनेडियन पब्लिक सर्विस ने उन्हें स्वर्ण पदक दिया गया.

– 1967 में डैनी हैनमैन पुरस्कार मिला.

– 1968 में लॉस्कर फेडरेशन पुरस्कार और लूसिया ग्रास हारी विट्ज पुरस्कार से सम्मानित किए गए.

– 1969 में भारत सरकार ने डॉ. खुराना को पद्म भूषण से अलंकृत किया.

– पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ ने डी.एस-सी. की मानद उपाधि से सम्मानित किया.

मनोंरजन / फ़ैशन

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