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25 Oct 2020 5:44 PM
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1965-71 जंग से मजबूत हुई हमारी आर्मी, हर चुनौती का सामना कर सकती है : जेटली

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नई दिल्ली. डोकलाम में बढ़ते तनाव और लगातार धमकियों के बीच इंडिया ने चीन को कड़ा मैसेज दिया है। अरुण जेटली ने राज्यसभा में कहा, “भारतीय सेनाएं देश की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना कर सकती हैं। हमने 1962 की लड़ाई से सबक लिया। बीते दशकों के दौरान भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया। 1965 और 1971 की जंग से हमारी सेनाएं मजबूत हुई हैं।” जेटली 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं सालगिरह पर स्पेशल डिबेट में बोल रहे थे। बता दें कि सिक्किम सेक्टर में भूटान ट्राइजंक्शन के पास चीन एक सड़क बनाना चाहता है और भारत इसका विरोध कर रहा है। करीब 2 महीने से इस इलाके में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। चीन ने भारत से कहा है कि वह इलाके से अपने सैनिकों को तुरंत वापस बुलाए, लेकिन भारत ने इससे इनकार कर दिया है।

1) हमें गर्व है, हर चुनौती के साथ मजबूत हुए
“बीते दशकों के दौरान भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया और हम गर्व के साथ ये कह सकते हैं कि हर चैलेंज के साथ हम और ज्यादा मजबूत होते गए। भारत ने 1962 में चीन के साथ जंग से सबक सीखा। हमने सीखा कि सेनाओं को इतना मजबूत होना चाहिए कि वो हर चुनौती का सामना कर सकतें। हम आज भी अपने पड़ोसियों से चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’
“1962 की तुलना में 1965 और 1971 की जंग में सेनाएं मजबूत हुई हैं। 1962 में इंडिया को चीन की ओर से थोपी गई जंग का सामना करना पड़ा और कुछ नुकसान उठाए। 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ जंग में भारत की जीत हुई।”
2) कुछ लोग आज भी हमारी स्वतंत्रता को चुनौती दे रहे
“मैं इस बात को मानता हूं कि आज भी कुछ चुनौतियां हैं। कुछ लोग हमारे देश की स्वतंत्रता और एकता को चुनौती दे रहे हैं। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि चाहे हमें पूर्वी बॉर्डर से चुनौती मिले या फिर पश्चिमी बॉर्डर से, हमारे वीर जवानों के पास देश को सुरक्षित रखने की क्षमता है। सेनाएं देश की रक्षा के लिए किसी भी तरह का बलिदान दे सकती हैं।”
3) हम भूल नहीं सकते कि देश का हिस्सा अलग हुआ था
जेटली ने कहा, “आजादी के तुरंत बाद हमने कुछ मुसीबतों का सामना किया। हमारे पड़ोसी की नजर कश्मीर पर थी। आज भी हम ये नहीं भूल सकते हैं कि देश का एक हिस्सा हमसे अलग हो गया था। ये हर भारतीय की ख्वाहिश है कि किस तरह से इस हिस्से को वापस हासिल किया जाए।”
4) धर्म और राजनीति के नाम पर हिंसा खत्म हो
“इस देश को हर तरह की हिंसा से मुक्त करने की जरूरता है। भले ही वो आतंकवाद के नाम पर होगा या फिर राजनीति या धर्म के नाम पर। देश आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। राजीव गांधी और इंदिरा गांधी ने टेररिज्म के चलते अपनी जान गंवाई। देश के बाहर और भीतर कुछ लोग हैं, जो आतंकवाद बढ़ा रहे हैं खासतौर पर उत्तरी इलाकों में। सिक्युरिटी फोर्सेस ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान दिया है। पूरे देश को एक आवाज में आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा।”
हिन्दी-चीनी भाई-भाई ही विवाद हल करने का जरिया: दलाई
* “डोकलाम विवाद कोई बहुत सीरियस मुद्दा नहीं है, पर दोनों देशों को एक दूसरे के पड़ोस में ही रहना है, इस मुद्दे पर गलत प्रोपेगैंडा से बात बिगड़ सकती है। 21वीं सदी का विषय बातचीत है, आधुनिक समय में हर देश दूसरे पर निर्भर है। अभी दोनों पड़ोसी एक-दूसरे के खिलाफ सख्त बयान जारी कर रहे हैं, लेकिन हिन्दी-चीनी भाई भाई की भावना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। 1962 में चीनी सेना बोमडिला जा पहुंची थी, लेकिन वापस लौट गई। भारत और चीन को इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा।”
चीनी मीडिया लगातार दे रहा है भारत को धमकी
* चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने मंगलवार को अपने एडीटोरियल में कहा था, “भारत 1962 की जंग का सबक भूल गया है, नेहरू ने हमें कमतर आंका था, मोदी भी हमारी वॉर्निंग को नजरअंदाज ना करें। अगर भारत डोकलाम विवाद पर चेतावनी को इसी तरह नजरअंदाज करता रहा तो बीजिंग जरूरी जवाबी कदम उठाएगा।”
* “डोकलाम विवाद कोई बहुत सीरियस मुद्दा नहीं है, पर दोनों देशों को एक दूसरे के पड़ोस में ही रहना है, इस मुद्दे पर गलत प्रोपेगैंडा से बात बिगड़ सकती है। 21वीं सदी का विषय बातचीत है, आधुनिक समय में हर देश दूसरे पर निर्भर है। अभी दोनों पड़ोसी एक-दूसरे के खिलाफ सख्त बयान जारी कर रहे हैं, लेकिन हिन्दी-चीनी भाई भाई की भावना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। 1962 में चीनी सेना बोमडिला जा पहुंची थी, लेकिन वापस लौट गई। भारत और चीन को इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा।”
कालापानी और कश्मीर में घुस जाएं तो भारत क्या करेगा-चीन
* चीन की टॉप डिप्लोमैट जनरल वांग वेनली ने भारतीय मीडिया के एक डेलीगेशन से बातचीत में वेनली ने कहा था, “अगर चीन उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाए तो नई दिल्ली क्या करेगा? इस वक्त भारत से बातचीत करना असंभव है क्योंकि चीन के लोग सोचेंगे कि हमारी सरकार काबिल नहीं है।” वेनली ने यह भी दावा किया कि भूटान ने डोकलाम को चीन का क्षेत्र मान लिया है।
क्या है डोकलाम विवाद?
* ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम एरिया में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है।
* इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।
भारत की क्या है चिंता?
* नई दिल्ली ने चीन से कहा है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा।

मनोंरजन / फ़ैशन

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