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20 Oct 2020 5:44 PM
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सेल चासनाला की खदान डूबी, करोड़ों का नुकसान, सैकड़ों ठेका मजदूर हुए बेरोजगार

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लापरवाही. पहले लॉजमेंट फिर धीरे-धीरे आइ-लेबल तक भरा पानी, कोयला उत्पादन ठप

सैकड़ों ठेका मजदूर हुए बेरोजगार, विभागीय कर्मचारियों पर लटकी तबादले की तलवार

माइंस को सुचारु रूप से चलाने में लग सकता है छह माह से अधिक का समय

सेल चासनाला कोलियरी डिवीजन का अपर सीम डीप माइंस (भूमिगत खदान) सोमवार को जलमग्न हो गया. इसका कारण ठीक से पंपिंग नहीं होना बताया जाता है. माइंस में पंप चालू कंडीशन में हैं, उन पर हर माह लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं. इसके बावजूद माइंस डूबने से स्थानीय प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. अपर सिम माइंस में पानी भरने से कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ है, वहीं कोयला उत्पादन भी ठप है.

पहले लॉजमेंट, फिर आइ लेबल में भरा पानी
खदान के लॉजमेंट में सबसे पहले पानी भरा. प्रबंधन की उदासीनता से पानी धीरे-धीरे माइंस के आइ-लेबल तक पानी भर गया. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार माइंस के लॉजमेंट में 4 सितंबर (सोमवार) को ही पानी भर गया था, लेकिन अधिकारियों ने इसकी सुधि तक नहीं ली. इससे 10 सितंबर तक पानी आइ-लेबल तक भर गया.

तीन मोटर पंप सहित ट्रांसफॉर्मर डूबा
लॉजमेंट में लगे दो मोटर पंप (140 एचपी व 160 एचपी), लेबल में लगा एक मोटर पंप (90 एचपी) व एक बड़ा ट्रांसफॉर्मर, स्टार्टर व स्विच सहित करोड़ों के सामान व पूर्जे डूब गये हैं.

कोयला उत्पादन ठप
खदान में पानी भरने से जहां सेल को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, वहीं रोज 350 टन कोयले का उत्पादन प्रभावित हुआ है. यहां से रोज तीनों शिफ्ट में करीब 350 टन कोयला उत्पादन होता है, जो ठप है. जानकार बताते है कि अगर प्रबंधन युद्ध स्तर पर जल निकासी करेगा तो भी माइंस को चालू होने में छह माह से अधिक का समय लग सकता है.

सैकड़ों ठेका मजदूर हुए बेरोजगार
त्योहार सिर पर हैं. ऐसे में अपर सीम खदान बंद होने से सैकड़ों ठेका मजदूर बेरोजगार हो गये. विभागीय कर्मचारियों पर भी तबादले की तलवार लटक रही है. खदान में तीनों शिफ्ट को मिला कर करीब 300 मैनपावर है. इनमें से करीब 285 ठेका मजदूर हैं.

हो रहा पंपिंग का काम
पहले खदान से पानी की निकासी ठेका मजदूरों से करायी जा रही थी, लेकिन निविदा समाप्त होने पर वर्तमान में पंपिंग का काम विभागीय कर्मचारी कर रहे हैं. संडे ड्यूटी व अन्य मांगाें को लेकर विभागीय कर्मचारी 3 सितंबर को हड़ताल पर थे. ऐसे में उस दिन पंपिंग का जिम्मा प्रबंधन ने अपने हाथों में रखा था. सूत्र बताते है कि हड़ताल के दिन ही पंपिंग ठीक से नहीं होने पर 4 सितंबर को खदान के लॉजमेंट में पानी भर गया था.

विभागीय सुपरविजन में कमी से एेसा हुआ है. हालांकि माइंस पूरी तरह से नहीं डूबा है. पंपिंग का काम युद्ध स्तर पर जारी है. इसके लिए तीन मोटर पंप लगाये गये थे, जिसमें से दो फेल हो गये. सोमवार को एक समरसेबल पंप लगाया गया था, जो जल गया. पुन: आज एक 500 जीपीएम का समरसेबल पंप लगाया गया है.

पीके मंडल, कोलियरी मैनेजर (सेल, चासनाला)

मनोंरजन / फ़ैशन

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