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23 Oct 2021 5:44 PM
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यूनिसेफ रिपोर्टः झारखंड में न्यूमोनिया और डायरिया से पांच साल से कम उम्र के 22 फीसदी बच्चों की मौत

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झारखंड में नवजात बच्चों की मृत्यु दर की स्थिति को देखते हुए यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट जारी किया है. यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि झारखंड में लगभग 25 हजार बच्चों की मौत उनके पहले साल में ही हो जाती है. जबकी 25 हजार में से लगभग 20 हजार ऐसे बच्चे हैं जिनकी मौत उनके जन्म लेने के 28 दिन के अंदर ही हो जाती है.

रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मौत के कई कराण है. किसी एक कारण से बच्चों की मौत नहीं हुई है. साथ ही रपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कैसे इन मौतों को रोका जाए, क्योंकि इस तरह की मृत्यु दर सरकार और समाज दोनों के लिए ही चिंता का विषय है. यूनिसेफ का मानना है कि पांच साल से कम उम्र के 22 फीसदी बच्चों की मौत न्यूमोनिया और डायरिया से हो रही है. जबकि, स्वास्थ्य विभाग के लिए केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों खर्च कर रही है. फिर भी इस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है.

मौतों के पीछे का कारण

बीमारी होने पर अस्पताल में कम घरेलू उपचार पर फोकस

कमजोरी के कारण स्तनपान नहीं कराना

मां का एनिमिक होना

गर्भावस्था या प्रसव के बाद पौष्टिक आहार नहीं लेना

समय पर बच्चों का टीकाकरण नहीं कराना

अस्पतालों के बजाए घरों में दाई या अनट्रेंड नर्स से प्रसव कराना

स्तनपान की भूमिका सर्वाधिक

शिशुओं की मृत्यु को रोकने में स्तनपान की भूमिका सबसे ज्यादा है. मां के दूध में बीमारी से लड़ने वाले पदार्थ मिलते हैं. इनमें आयरन, फैटी एसिड, कैल्सियम, जिंक, फोलिक एसिड और विटामिन हैं. ये सभी तत्व बच्चों के शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और बच्चों में डायरिया और सांस की तकलीफ नहीं होती है.

डिब्बाबंद दूध से मां का दूध ज्यादा बेहतर है. जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने से एक महीने के दौरान होनेवाली मौतों को 22 फीसदी तक कम की जा सकती है. आंकड़ों को मानें तो राज्य में 33.2 फीसदी माताएं ही अपने बच्चों को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान करातीं हैं.

टीकाकरण बिमारियों से बच्चों को बचाता है
बच्चों का नियमित टीकाकरण हो तो बच्चे नौ तरह की बीमारियों से बच सकते हैं. टीबी, डिप्थीरिया, कुकर खांसी, टेटनस, पोलियो, खसरा, हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया और जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी बीमारियां शामिल हैं. अगर इन बीमारियों के टीके नियमित रूप से लेते हैं तो करीब सात फीसदी मौतों में कमी आएगी.

झारखंड में 61.9 प्रतिशत महिलाएं अस्पतालों में बच्चे को जन्म देती हैं. इसके प्रमोशन के लिए सरकार फ्री में ममता वाहन व प्रोत्साहित राशि 1400 रुपए देती है. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम भी सरकार चला रही है फिर भी मात्र 61.9 प्रतिशत ही महिलाएं अस्पताल में प्रसव कराती हैं.

मनोंरजन / फ़ैशन

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