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बिहार सृजन घोटाला : गिरफ्तार नाजिर महेश मंडल की अस्पताल में मौत

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भागलपुर : सृजन घोटाले में गिरफ्तार जिला कल्याण विभाग के नाजिर महेश मंडल की रविवार की देर रात 11 बजे जेएलएनएमसीएच में मौत हो गयी. वह किडनी की बीमारी से पीड़ित था. उसे सात दिन पहले गिरफ्तार किया गया था. महेश के परिजनों ने जिला प्रशासन पर जान-बूझ कर मारने का आरोप लगाया. अस्पताल की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. मिली जानकारी के अनुसार जेल में बंद महेश की तबीयत रविवार की देर शाम बिगड़ गयी. इसके बाद जेल प्रशासन ने जेएलएनएमसीएच लाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. अस्पताल में मौजूद महेश के दामाद ने कहा कि कोर्ट से भी आदेश मिल गया था. उनका डायलिसिस होना था, लेकिन अधिकारियों ने एक नहीं सुनी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग चाहते थे कि उनकी मौत हो जाये, ताकि घोटाले में फंसने से वे बच जाएं. महेश की मौत की खबर जैसे ही परिजनों को मिली, सभी अस्पताल की ओर दौड़े. इतना ही नहीं, चारपहिया वाहनों के अलावा टेंपो से भी लोग पहुंचे. इसके बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गयी. इसकी सूचना पर बरारी पुलिस भी अस्पताल पहुंची. अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण था.

हर माह महेश के खाते में आता था पांच लाख रुपया
जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यालय में कार्यरत नाजिर महेश मंडल के खाते में हर माह पांच लाख रुपये कमीशन मिलता था और ये पैसे से उनकी पत्नी राज कर रही है. एक करोड़ से अधिक के गहने पहनने का शौक था. इससे पूर्व ‘सृजन’ घोटाले में पुलिस ने रविवार को कचहरी चौक स्थित कलिंगा सेल्स शो-रूम में छापेमारी की. इसके अलावा कलिंगा सेल्स के मालिक एनवी राजू, बिग शॉप के मालिक किशोर घोष, रीबॉक व फैशन प्वाइंट शो-रूम के मालिक विपिन शर्मा और सृजन के एकाउंटेंट पीके घोष के आवास पर भी छापेमारी की गयी. पुलिस ने कलिंगा सेल्स के मैनेजर से पूछताछ की और काउंटर से 200 रुपये का ब्लैंक स्टांप, कई नाम वाली डायरी, चेकबुक, सहारा इंडिया में पैसा जमा करने की हिसाब-किताब वाली नोटबुक बरामद की.

छापेमारी जारी
कलिंगा सेल्स के तीन गोदाम और दो फ्लैट मिले जिस बिल्डिंग में कलिंगा सेल्स है, उसमें कलिंगा सेल्स के तीन फ्लोर में तीन गोदाम के अलावा एनवी राजू के दो फ्लैट (401 व 402) हैं. गोदाम में भी सीसीटीवी कैमरे लगे थे और उसमें मुख्य गेट के अलावा एक चोर दरवाजा भी था. महात्मा गांधी पथ पर श्रीकुंज अपार्टमेंट में बिग शॉप के मालिक किशोर घोष के फ्लैट नंबर 303 में भी पुलिस छापा मारने पहुंची, लेकिन फ्लैट बंद रहने के कारण उसे लौट जाना पड़ा. दूसरी ओर भीखनपुर में बिग शॉप के मालिक किशोर घोष के निर्माणाधीन दो अपार्टमेंट में पुलिस ने छापेमारी की. यहां पुलिस को किशोर घोष के भांजे ने बताया कि इसे बनाने के लिए स्टेट बैंक से 59 लाख रुपये का लोन लिया गया है. इसी अपार्टमेंट में बिग शॉप के कपड़े का गोदाम भी है.

कई शो रूम में छापेमारी
सृजन के एकाउंटेंट पीके घोष के भीखनपुर इशाकचक स्थित आवास पर छापेमारी हुई. विपिन शर्मा के तिलकामांझी शीतला स्थान स्थित आवास पर भी छापामारी हुई. बता दें कि विपिन शर्मा को शुक्रवार को भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया था. वहीं सहकारिता बैंक के गिरफ्तार अधिकारियों की संख्या छह हो गयी है. चार से पूछताछ की जा रही है. रविवार को सृजन के दो कर्मी बिंदु ठाकुर व उमेश कुमार को पुलिस ने उठाया. एसएसपी आवास पर उन्हें लाकर पूछताछ की जा रही है. नवगछिया सहकारिता बैंक मैनेजर अशोक कुमार अशोक व कहलगांव सहकारिता बैंक की मैनेजर सुनीता चौधरी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. इन दोनों को पुलिस ने शनिवार को ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को हुई. उनसे पूछताछ की जा रही है. इससे पहले शनिवार को सुपौल के जिला सहकारिता पदाधिकारी पंकज कुमार झा, भागलपुर को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व मैनेजर सुधांशु कुमार दास, उपाध्यायजी व बांका स्थित को-ऑपरेटिव बैंक के मैनेजर विजय कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार सभी छह पदाधिकारियों को आज जेल भेजा जा सकता है.

कैसे शुरू हुआ घोटाले का खेल
वर्ष 2007-2008 में सृजन को-ऑपरेटिव बैंक खुल जाने के बाद से घोटाले का खेल शुरू होता है. भागलपुर ट्रेजरी के पैसे को सृजन को-ऑपरेटिव बैंक के खाते में ट्रांसफर करने और फिर वहां से सरकारी पैसे को बाजार में लगाया जाने लगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सृजन में स्वयं सहायता समूह के नाम पर कई फर्जी ग्रुप बनाये गये. उनके खाते भी खोले गये और इन खातों के जरिये नेताओं और नौकरशाहों का कालाधन सफेद किया जाने लगा.

कैसे होता था घोटाला
सरकारी विभाग के बैंकर्स चेक या सामान्य चेक के पीछे ‘सृजन समिति’ की मुहर लगाते हुए मनोरमा देवी हस्ताक्षर कर देती थीं. इस तरह उस चेक का भुगतान सृजन के उसी बैंक में खुले खाते में हो जाते थे. जब भी कभी संबंधित विभाग को अपने खाते की विवरणी चाहिए होती थी, तो फर्जी प्रिंटर से प्रिंट करा कर विवरणी दे दी जाती थी. इस तरह विभागीय ऑडिट में भी अवैध निकासी पकड़ में नहीं आ पाती थी.

वर्ष 2008 से ही हो रहा था घोटाला
सृजन में घोटाला वर्ष 2008 से ही हो रहा है. उस समय बिहार में जदयू-भाजपा की सरकार थी. वित्त मंत्रालय का प्रभार सुशील कुमार मोदी के पास था. उसी साल ऑडिटर ने यह गड़बड़ी पकड़ ली. तब ऑडिटर ने आपत्ति जतायी कि सरकार का पैसा को-ऑपरेटिव बैंक में कैसे जमा हो रहा है? उसके बाद तत्कालीन एसडीएम विपिन कुमार ने सभी प्रखंड के अधिकारियों को पत्र लिखा कि पैसा ‘सृजन’ के खाते में जमा नहीं करें. इसके बावजूद सब कुछ पहले जैसा ही होता रहा. आखिर कोई जिलाधिकारी किसके आदेश पर सरकारी विभागों का पैसा ‘सृजन को-ऑपरेटिव बैंक’ के खाते में भेज रहा था? यहां पदस्थापित होनेवाले दूसरे कई जिलाधिकारियों ने भी ऐसा होने दिया. इसके बाद 25 जुलाई, 2013 को भारतीय रिजर्व बैंक ने बिहार सरकार से कहा था कि इस को-ऑपरेटिव बैंक की गतिविधियों की जांच करें. रिजर्व बैंक का आदेश है कि अगर 30 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी होगी, तो जांच सीबीआई करेगी. वर्ष 2013 में भागलपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी प्रेम सिंह मीणा ने ‘सृजन’ की बैंकिंग प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए जांच टीम गठित कर दी थी. अब फिर यह मामला गर्म हो गया है.

मनोंरजन / फ़ैशन

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