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30 Oct 2020 5:44 PM
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नोटबंदी में एकाउंट में जमा हुए थे 30 करोड़ ब्लैक मनी, पुंज सिंह ने अवैध कमाई छुपाने के लिए बना रखी हैं कई फर्जी कंपनियां

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पुंज सिंह ने अवैध कमाई छुपाने के लिए बना रखी हैं कई फर्जी कंपनियां
पुलिस अफसर व सफेदपोशों से करीबी संबंध

ब्राॅडसन कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर पुंज सिंह शराब व बालू का बड़ा माफिया है. करोड़ों के टर्नओवर हैं. अवैध कमाई को छुपाने के लिए उसने कई फर्जी कंपनी भी बना रखी है. नोटबंदी के दौरान उसने अपने बैंक एकाउंट में 30 करोड़ रुपये जमा किये थे. जिसमें 500-1000 के नोट शामिल थे. पुलिस सूत्रों की मानें तो इनकम टैक्स विभाग ने उससे पूछताछ की थी, जिसमें उसने 20 करोड़ रुपये तत्काल भर देने का आॅफर किया था. इस मामले में अभी जांच जारी है.

पुंज सिंह को पटना पुलिस सुभाष यादव से भी बड़ा सेटर मान रही है. अवैध कारोबार को चलाने के लिए उसने पूरा नेटवर्क खड़ा किया है. पुलिस पड़ताल कर रही है.

ब्राॅडसन कंपनी में 65 प्रतिशत शेयर हैं पुंज सिंह के
हिरासत में लिये जाने के बाद पुंज सिंह भले ही सुभाष यादव को नहीं जानने की बात कह रहा है, लेकिन दोनों ब्राॅडसन कंपनी में पार्टनर हैं. पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि ब्राॅडसन कंपनी में पुंज सिंह का 65 प्रतिशत शेयर है, जबकि, कंपनी पर अवैध बालू खनन कराने का आरोप है.

धनबाद के शराब सिंडिकेट का प्रमुख सदस्य रहा है पुंज
शराब कारोबार सिंडिकेट में पुंज सिंह प्रमुख सदस्य रहे हैं. धनबाद में कई सालों तक शराब कारोबार पर कब्जा जमाये रखा. सिंडिकेट बनाकर धनबाद व आसपास में बालू के कारोबार में भी पुंज एंड कंपनी ने भाग्य अजमाया था. एनजीटी के कारण बालू उत्खनन में नियम प्रक्रिया जटिल होने समेत अन्य कारणों को सिंडिकेट को बड़ा मुनाफा नहीं हो सका. झारखंड में शराब की बिक्री सरकार द्वारा अपने करने से फैसले से इस बार पुंज सिंडिकेट को झटका लगा है. पुंज एंड कंपनी की ओर से बिहार में कई वर्षों से बालू कारोबार किया जा रहा है. राजद से जुड़े सुभाष यादव व एक विधान परिषद सदस्य के साथ मिलकर पुंज ने बड़ा सिंडिकेट बना रखा है. सिंडिकेट में पुंज के साथ मिथिलेश सिंह समेत धनबाद के कई कारोबारी शामिल हैं.

सत्ता व पुलिस का बराबर मिलता रहा लाभ
सत्ता व पुलिस से संपर्क के कारण पुंज को शराब व बालू कारोबार में विशेष लाभ मिलता था. पूर्व में पुंज को बिहार से तो अभी हाल में धनबाद जिला बल से सरकारी बॉडीगार्ड मिला हुआ था. डीआइजी स्तर के एक आइपीएस अधिकारी से पुंज का करीबी संबंध था. संबंधित डीआइजी ने ही पुंज को बॉडीगार्ड दिलवाया था. सुरेश हत्याकांड के गवाह देवेंद्र सिंह से विवाद में पुंज ने डीआइजी के सहयोग से केस में लाभ लिया. डीआइजी के साथ-साथ पूर्व में एक डीएसपी (बदल कर चले गये) ने नजदीकी का धनबाद में खूब लाभ उठाया. पुंज सरकारी बॉडीगार्ड के साथ होने व जिले में दबंग घराना को सिंडिकेट में जोड़कर खूब लाभ लिया. पुलिस अफसरों के पास पुंज की बैठकी होती रही है.

पुंज का धनबाद व बिहार के राजनेताओं के साथ पुलिस महकमे में अच्छी पकड़ रही है.
लालू के करीबी नेताओं के कारोबारी से जुड़ जाने के बाद ही पुंज एंड कंपनी को कई बालू घाट का ठेका मिल थी. एनजीटी के रोज के बावजूद गलत तरीके से बालू घाटों पर जेसीबी व पौकलैंड से बालू उत्खनन कराया जा रहा है. सिंडिकेट के अहम सदस्य होने के कारण प्रतिदिन अवैध रूप होने वाली आय से लाखों रुपये प्रतिदिन पुंज को हिस्सा मिल रहा था. सत्ता व पुलिस से मिलीभगत के कारण अवैध बालू उत्खनन कर ब्राॅडसन कंपनी से जुड़े सिंडिकेट व एक अन्य कंपनी ने करोड़ों रुपये कमाये हैं. कारोबार से करोड़ों की आय का हिस्सा सत्ता से जुड़े नेताओं तक पहुंचता रहा है. बिहार में सरकार बनने के बाद बालू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू होते ही सुभाष यादव के साथ पुंज भी कानूनी शिकंजे में फंस गया. पुलिस व राजनेताओं का संबंध का ही परिणाम है कि पुंज को झरिया पुलिस ने हड़बड़ी में गुरुवार पीआर बॉन्ड पर छोड़ दिया था. पटना पुलिस की कोशिश पुंज को रोकने की थी, जिसमें वह असफल रही.

मनोंरजन / फ़ैशन

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