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31 Oct 2020 5:44 PM
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नयी दिल्ली -कोलकाता फोर लेन, बड़े पैमाने पर जानवरों को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने का धंधा चल रहा है

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धनबाद जीटी रोड से रोजाना 100 से अधिक जानवर लदी गाड़ियां जा रही है कोलकाता
उत्तर प्रदेश और मध्य बिहार से धनबाद जिले से गुजरनेवाले जीटी रोड (नयी दिल्ली -कोलकाता फोर लेन) से बड़े पैमाने पर जानवरों को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने का धंधा चल रहा है. हर रोज 100 से अधिक गाड़ियों में भर कर गोवंशीय पशु समेत अन्य जानवरों को बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजा रहा है. इसमें मवेशी तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है. एक, दो नहीं बल्कि दर्जनों गिरोह सक्रिय हैं. सभी मिलकर इस धंधे को फलने-फूलने में सहयोग कर रहे हैं. धनबाद जिले में इसका लंबा नेटवर्क बन चुका है, जो तोपचांची से लेकर मैथन तक गाड़ी पास करवाते हैं. झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 धनबाद जिले में बेअसर साबित हो रहा है. पशु तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पुलिस द्वारा यदा-कदा पशु लदे कुछ वाहनों को जब्त कर खानापूर्ति की जाती है. जीटी रोड पर पड़नेवाले थानों के पुलिसकर्मियों, पशु चिकित्सकों, स्थानीय नेताओं, सफेदपोश लोगों और कथित समाजसेवियों की सहभागिता इस धंधे में है. सभी को हिस्सेदारी मिल रही है. सभी का रेट तय है. इस धंधे से आर्थिक लाभ उठानेवालों में कुछ वैसे लोग भी शामिल हैं, जो गोवंशीय पशुओं की रक्षा का दंभ भरते हैं. दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह कि गोवंशीय पशु पकड़े जाने की स्थिति में एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया जाता है.

अब एसी कंटेनरों में भर कर हो रही है पशु तस्करी
धनबाद. झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 को धत्ता बताते हुए धनबाद जिले से गुजरनेवाले जीटी रोड से पशु तस्करी अब हाइटेक हो चुकी है. बिहार व उत्तर प्रदेश से आने वाले गोवंशीय पशु समेत अन्य जानवरों की तस्करी के लिए एसी कंटेनर युक्त गाड़ी का प्रयोग किया जा रहा है. इसमें जानवर के पैर व मुंह को बांध कर डाल दिया जाता है. एक कंटेनर में लगभग 30-35 जानवर होते हैं. इन गाड़ियों पर अलग-अलग कंपनियों का लोगो लगा रहता है. इससे पहली नजर में लगता है कि किसी कंपनी का माल जा रहा है, लेकिन इसके अंदर से गोवंशीय पशु होते हैं. इस तरह की एक-दो गाड़ी नहीं, बल्कि 40-45 गाड़ियां रहती हैं, जो एक साथ चलती हैं. इसके अलावा ट्रक व पीकअप वैन में भी गोवंशीय पशु की तस्करी की जाती है. ट्रक में 20-22 व पीकअप में 4-5 जानवर लोड रहते हैं. इसे धनबाद जिले के जीटी रोड में पहुंचने के पहले त्रिपाल से घेर दिया जाता है.

कई मडियों से उठाये जाते हैं जानवर
गोवंशीय पशु समेत अन्य जानवरों की तस्करी करनेवाले गिरोह का नेटवर्क बिहार, झारखंड व बंगाल तक फैला हुआ है. गोवंशीय पशु समेत अन्य जानवरों को उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार के औरंगाबाद, सासाराम, बक्सर, मोहनिया व अन्य इलाकों की मंडी से उठाया जाता है. गाड़ी में माल लोड होने के बाद गया की शेरघाटी में गाड़ी के ऊपर त्रिपाल डाल दिया जाता है, जबकि कंटेनर इसी तरह से रहता है. बिहार का गिरोह शेरघाटी तक आकर लौट जाता है. धनबाद पहुंचने के पहले ही यहां के गिरोह को सूचना मिल जाती है.

हाइवे पर तैनात होती है लग्जरी गाड़ियां : गाड़ियों को बंगाल तक पहुंचाने के लिए तस्कर नेशनल हाइवे पर क्सयू 500, काले रंग का स्वीफ्ट डिजायर, स्वीफ्ट कार व स्कोर्पियो जैसी लग्जरी गाड़ियों के साथ तैनात होते हैं. यह जानवर लदी गाड़ी के आगे या पीछे नहीं चलते. लग्जरी गाड़ियों में सवार तस्कर किसी होटल अथवा सड़क किनारे खड़े होते हैं. सभी थाना क्षेत्रों में इनकी एक-एक गाड़ी किसी न किसी स्थान पर खड़ी रहती है. किसी तरह की चेकिंग अथवा परेशानी की सूचना मिलने पर सभी सदस्य वहां से निकल पड़ते हैं.

बांग्लादेश भेजे जाते हैं जानवर : उत्तर प्रदेश-बिहार से गाड़ियों पर लोड जानवरों की खेप धनबाद के रास्ते पश्चिम बंगाल व उसके बाद मुर्शिदाबाद होते हुए इलम बाजार पहुंचती है. यहां पर सभी गाड़ियां खाली करायी जाती है. इसके बाद जानवरों को बांग्लादेश भेजा जाता है. बांग्लादेश में गोवंशीय पशु की बहुत ज्यादा डिमांड है और इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.

पुलिस की कमाई का बड़ा स्रोत, प्रतिमाह तीन करोड़ की वसूली
जानवरों की तस्करी का यह धंधा धनबाद जिले के जीटी रोड पर पड़नेवाले थानों की पुलिस की कमाई का बड़ा स्रोत बना हुआ है. 13 जून, 2016 की रात हरिहरपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी संतोष रजक द्वारा चमड़ा लदे ट्रक के चालक मोहम्मद नाजिम को गोली मारने के मामले के मूल में पुलिस की वसूली थी. तस्करी में धनबाद के कई गिरोह सक्रिय हैं. इसमें तोपचांची, राजगंज, बरवाअड्डा, गोविंदपुर, निरसा व मैथन तक कई गिरोह सक्रिय हैं और सभी गिरोह का अलग अलग गाड़ियां हाइवे से गुजरती हैं. प्रत्येक थानों में बड़ी गाड़ी के 5000 व छोटी गाड़ी के 2000 रुपये तय हैं. हर दिन जानवर लदे 100 से अधिक ट्रक धनबाद जिले से जीटी रोड होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते हैं. एक अनुमान के अनुसार पशु तस्करी रोकने के लिए जिम्मेवार पशु क्रूरता निवारण समिति (एसपीसीए) से जुड़े अफसराें और जीटी रोड के थानों की पुलिस द्वारा प्रतिमाह करीब तीन करोड़ रुपये की वसूली की जाती है.

तोपचांची से लेकर मैथन तक
हाइवे पर गाड़ी जैसे ही चढ़ती है, वैसे पुलिस वालों को सूचना मिल जाता है. इस काम के लिए थाना प्रभारी द्वारा थाना के एक जमादार या मुंशी को पूरा जिम्मा सौंपा जाता है. रुपये लेने से लेकर गाड़ी पास करवाने तक की जिम्मेदारी दी जाती है. थाना क्षेत्र में गाड़ी आने के पहले ही गिरोह के सदस्य मुंशी व जमादार द्वारा प्रयोग किये जाने वाले फर्जी नंबर पर गाड़ियों के संबंध में मैसेज कर देते हैं. मैसेज में गाड़ी की संख्या, गाड़ी का नंबर व किस प्रकार की गाड़ी है, इसका पूरा विवरण रहता है. गाड़ी पहुंचने के पहले रुपया भी भेजवा दिया जाता है. यह सिलसिला तोपचांची से लेकर मैथन थाना तक चलता है. मैथन के बाद गाड़ी बंगाल में प्रवेश करती है.

नेता से लेकर पत्रकार तक हिस्सेदार : इस धंधे में सिर्फ थाना प्रभारी या पुलिस के पास ही राशि नहीं जाती है. विभिन्न स्तर पर राशि का बंटवारा किया जाता है. विभिन्न राजनीतिक दलों केे नेताओं को हिस्सा मिलता है. किसी को हिस्सेदारी नहीं मिलने पर जिला से लेकर राजधानी रांची तक के वरीय अधिकारियों तक शिकायत करने की परंपरा रही है. कुछ थानों द्वारा कुछ पत्रकारों को पैसे दिये जाते हैं, जबकि पत्रकार गिरोह के सदस्य से भी राशि वसूलते हैं.
बकरी इंस्पेक्टर भी करते हैं वसूली : यही हाल एसपीसीए का है. एसपीसीए निरीक्षकों को बोलचाल की भाषा में बकरी इंस्पेक्टर व मवेशी डॉक्टर बोला जाता है. खाकी वरदी में कुछ लोगों के साथ बकरी इंस्पेक्टर रात को जीटी रोड पर देखे जाते हैं. आरोप है कि जानवर तस्करों से वसूली जानेवाली राशि में अच्छा-खासा हिस्सा बड़े नेताआें तक भी पहुंचता है. एक अनुमान के मुताबिक तस्कर एक ट्रक पर प्रतिदिन 50,000 रुपये घूस में खर्च करते हैं. बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल में यह राशि वसूली जाती है.

कानून और स्थिति

22 नवंबर, 2005 को झारखंड में गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को मंजूरी दी गयी. इस अधिनियम के तहत गाय-बैल को राज्य से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध है. एसपीसीए निरीक्षकों को अधिनियम के प्रावधानों को लागू करना है. पशुओं पर क्रूरता करनेवालों के खिलाफ कोर्ट में प्रोसिक्यूशन भेजना है. स्थानीय थाना से सहयोग लेना है. एफआइआर के लिए थानों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके बावजूद गाय व बैल प्रतिदिन ट्रकों पर लादकर जीटी रोड से बांग्लादेश ले जाया जा रहा है. प्रावधानों के तहत एक ट्रक पर अधिक से अधिक 50 बकरियों को ही ले जाया जा सकता है, जबकि एक ट्रक पर 250-300 बकरियां लादकर भेजी जा रही हैं. चारा-पानी का भी कोई इंतजाम नहीं रहता है. एसपीसीए निरीक्षकों के साथ मवेशी कारोबारी व ट्रक चालकों में पैसे को लेकर विवाद भी होते रहे हैं. धनबाद जिले के जीटी रोड पर पड़नेवाले गोविंदपुर थाना में वर्ष 2010 में इसी तरह के विवाद में रंगदारी व मारपीट का केस दर्ज हुआ था. तीन लोग पकड़े गये थे और दो भाग निकले थे. पुलिस ने पांचों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. यह मामला काफी चर्चित हुआ था. जिले में राजगंज-तोपचांची की सीमा, गोविंदपुर, खरकाबाद, मैथन चौक से पहले जानवर लदी गाड़ियों से एसपीसीए निरीक्षकों द्वारा रात भर वसूली की जाती है. प्रति ट्रक 2000 से 5000 रुपये तक की वसूली करते हैं. मवेशी तस्करों से पैसे लेकर कारोबार की छूट देने और दुधारू गाय व भैंस व्यापारियों से वसूली को लेकर विवाद हुआ था. दो वर्ष पूर्व धनबाद जिले के गोविंदपुर से लेकर मैथन तक स्थानीय लोगों ने दर्जनों ट्रक मवेशी जब्त कर पुलिस को सौंपे थे. पुलिस व एसपीसीए के खिलाफ लोगों ने हंगामा किया था.

मनोंरजन / फ़ैशन

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