संदेश ! हमारी सोच, आपकी पहचान !
संदेश ! हमारी सोच, आपकी पहचान !
22 Oct 2021 5:44 PM
BREAKING NEWS
ticket title
धनबाद में दो अतिरिक्त कोविड अस्पताल को मिली मंजूरी, पीएमसीएच कैथ लैब में दो सौ बेड का होगा कोविड केयर सेंटर
सांसद पुत्र के चालक की कोरोना से मौत, 24 घंटे में दो मौत से मचा हड़कंप
बेरमो से हॉट स्पॉट बने जामाडोबा तक पहुंचा कोरोना ! चार दिन में मिले 34 कोविड पॉजिटीव
विधायक-पूर्व मेयर की लड़ाई की भेंट चढ़ी 400 करोड़ की योजना
वाट्सएप पर ही पुलिसकर्मियों की समस्या हो जाएगी हल, एसएसपी ने जारी किया नंबर
CBSE की 10वीं और 12वीं परिणाम 15 जुलाई तक घोषित कर दिए जाएंगे
डीजल मूल्यवृद्धि का असर कहां,कितना,किस स्तरपर,किस रूप में पड़ेगा- पढ़े रिपोर्ट
झरिया विधायक से मिलने पहुंचे छोटे व्यवसायियों
पेट्रोलियम पदार्थ को लेकर झामुमो द्वारा विरोध प्रदर्शन
बिहार में आंधी-बारिश, ठनका गिरने से 83 लोगों की मौत

क्यों मनाते हैं छठ महापर्व, आइये जानते हैं छठ महापर्व से जुडी कहानियां जो महत्व को दर्शाता है

Post by relatedRelated post

भारत की विविध संस्कृति का एक अहम अंग यहां के पर्व हैं. भारत में ऐसे कई छठ पर्व हैं जो बेहद कठिन माने जाते हैं और इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पर्व. छठ को सिर्फ पर्व नहीं महापर्व कहा जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जली व्रत रखा जाता है. आइए आज के इस अंक में जानें छठ के बारे में कुछ विशेष बातें और छठ व्रत कथा.

क्यों मनाते हैं छठ महापर्व
भारत की विविध संस्कृति का एक अहम अंग यहां के पर्व हैं. भारत में ऐसे कई छठ पर्व हैं जो बेहद कठिन माने जाते हैं और इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पर्व. छठ को सिर्फ पर्व नहीं महापर्व कहा जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जली व्रत रखा जाता है. आइए आज के इस अंक में जानें छठ के बारे में कुछ विशेष बातें और छठ व्रत कथा.

क्या है छठ
छठ पर्व और षष्ठी का अपभ्रंश है. कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन है और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है. इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया.

आइये जानते हैं छठ महापर्व से जुडी कहानियां जो इसके महत्व को दर्शाता है

भगवान सूर्य के आशीर्वाद से राजा प्रियव्रत को संतान प्राप्ति
बहुत प्राचीन समय की कथा है. एक बहुत प्रतापी राजा हुए. उनका नाम प्रियव्रत था. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. लेकिन उस दम्पती को कोई संतान नहीं थी. महामुनि कश्यप के आदेश पर उन लोगों ने पुत्र प्राप्ति यज्ञ किया. पुत्र भी हुआ, लेकिन मृत पैदा हुआ. इस घटना से राजा और रानी अति विचलित हो गये और अपने -अपने प्राण त्यागने की सोचने लगे.

उसी समय ब्रह्मा जी की मानस पुत्री देवसेना वहां प्रकट हुई. उन्होंने राजा से कहा कि वे सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं. इसीलिए उनको षष्ठी कहा जाता है. उनकी पूजा करने से उन्हें संतान की प्राप्ति होगी. राजा और रानी ने बहुत ही नियम और निष्ठापूर्वक छठी माता की पूजा की और उनको एक सुन्दर-सा पुत्र की प्राप्ति हुई . यह पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी को की गयी थी. कहा जाता है कि तभी से छठ पूजा की जाती है.

माता सीता ने भी की थी छठ पूजा
बात त्रेता युग की है. दशानन रावण का वध करके भगवान् राम विजयादशमी के दिन अयोध्या पहुंचे और उनकी वापसी की खुशी में दीपावली का पर्व मनाया जाता है. लंका युद्ध में बहुत सारे लोगों का संहार हुआ था. रावण और उसके भाइयों का प्रभु श्रीराम ने विनाश किया. गुरु और ऋषियों की सलाह पर रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए भगवान् राम ने राजसूय यज्ञ किया. इस यज्ञ में ऋषि मुद्गल भी अयोध्या पधारे.

ऋषि मुद्गल ने माता सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष षष्ठी को सूर्यदेव के उपासना करने का आदेश दिया. माता सीता ने उनके आश्रम में रहकर छः दिनों तक भगवान सूर्य की पूजा की. तभी से इस दिन छठ पर्व मनाया जाने लगा.

दानवीर कर्ण ने भी की थी सूर्य की उपासना और छठ पूजा
महाभारत में भी छठ पूजा और सूर्य पूजा के उदहारण मिलते हैं. कहा जाता है कि दानवीर कर्ण ने छठ पूजा की शुरुआत की थी. कर्ण को सूर्यपुत्र भी कहा जाता है. वे सूर्य के बहुत बड़े उपासक थे. कहा जाता है कि वे प्रतिदिन सूर्य की उपासना करते है और अपने द्वार पर आये याचक को दान करते थे. वे प्रतिदिन घंटों कमर तक गंगाजल में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा अर्चना किया करते थे. भगववान सूर्य और छठी माता की कृपा से वे एक महान योद्धा बने.

द्रौपदी ने भी की थी छठ पूजा
जब पांडव जुए में सब कुछ हार गए थे, तब द्रौपदी ने छठ पूजा की थी. छठ पूजा के उपरांत इसका फल मिला और पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया और उन्होंने बहुत लम्बे समय तक हस्तिनापुर पर राज किया.

नहीं जानते होंगे, छठ पर्व की शुरुआत आखिर कैसे हुई?
इन सभी कथाओं से छठ पूजा की प्राचीनता और महत्ता का पता चलता है. आज यह पर्व देश और विदेशों में भी मनाई जाती है. यह पर्व बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मुंबई, दिल्ली, न्यूयॉर्क आदि जगहों पर मनाया जाता है. इस पर्व में लोक मंगल के तत्त्व समाहित है. सूर्य उपासना से जीवन को नव उर्जा मिलती है. छठ माता हम सब पर अपनी कृपा बनाये रखें, देश का विकास हो, सर्वत्र सुख और शांति रहे. यही छठ माता से हमारी प्रार्थना है.

आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। बिहार और पूर्वांचल के निवासी इस दिन जहां भी होते हैं सूर्य भगवान की पूजा करना और उन्हें अर्घ्य देना नहीं भूलते।
यही कारण है कि आज यह पर्व बिहार और पूर्वांचल की सीमा से निकलकर देश विदेश में मनाया जाने लगा है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व बड़ा ही कठिन है।

इसमें शरीर और मन को पूरी तरह साधना पड़ता है इसलिए इसे पर्व को हठयोग भी माना जाता है। इस कठिन पर्व की शुरुआत कैसे हुई और किसने इस पर्व को शुरु किया इस विषय में अलग-अलग मान्यताएं हैं।

 

छठ पूजा में प्रयोग होने वाली सामग्री 

  • दौरी या डलिया
  • सूप – पीतल या बांस का
  • नींबू
  • नारियल (पानी सहित)
  • पान का पत्ता
  • गन्ना पत्तो के साथ
  • शहद
  • सुपारी
  • सिंदूर
  • कपूर
  • शुद्ध घी
  • कुमकुम
  • शकरकंद / गंजी
  • हल्दी और अदरक का पौधा
  • नाशपाती व अन्य उपलब्ध फल
  • अक्षत (चावल के टुकड़े)
  • खजूर या ठेकुआ
  • चन्दन
  • मिठाई
  • इत्यादि

मनोंरजन / फ़ैशन

रेमो डिसूजा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, 5 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
रेमो डिसूजा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, 5 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

धोखाधड़ी का यह मामला साल 2016 का बताया गया है एक प्रॉपर्टी डीलर ने रेमो डिसूजा पर 5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया था सेक्शन 420, 406, 386 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई गाजियाबाद । डांस की दुनिया के ग्रेंड मास्टर में शुमार मशहूर कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा के लिए एक बुरी…

Read more

अन्य ख़बरे

Loading…

sandeshnow Video


Contact US @

Email: swebnews@gmail.com

Phone: +9431124138

Address: Dhanbad, Jharkhand

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com